पहले मन को साफ़ करो फिर साईं का ध्यान धरो
पहले मन को साफ़ करो फिर साईं का ध्यान धरो
पहले मन को साफ़ करो,
फिर साईं का ध्यान धरो।
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
मन में तेरे कपट भरा है, मुख से मीठा बोले,
फिर कैसे सतचिदानंद साईं, द्वार दया का खोले?
मन-वाणी को एक करो, कर्मों को भी नेक करो,
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
ग़ैरों के दुःख में जो अपने, खुद के दुःख को भूले,
वो अपने शुभ कर्मों से, साईं के दिल को छू ले।
सबसे सद्व्यवहार करो, दुश्मन से भी प्यार करो,
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
जग का स्वामी अंतर्यामी, साईं भोला भाला,
भोलेपन पर मोहित होता, सतगुरु शिरडी वाला।
रब से मत तकरार करो, हर गलती स्वीकार करो,
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
फिर साईं का ध्यान धरो।
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
मन में तेरे कपट भरा है, मुख से मीठा बोले,
फिर कैसे सतचिदानंद साईं, द्वार दया का खोले?
मन-वाणी को एक करो, कर्मों को भी नेक करो,
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
ग़ैरों के दुःख में जो अपने, खुद के दुःख को भूले,
वो अपने शुभ कर्मों से, साईं के दिल को छू ले।
सबसे सद्व्यवहार करो, दुश्मन से भी प्यार करो,
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
जग का स्वामी अंतर्यामी, साईं भोला भाला,
भोलेपन पर मोहित होता, सतगुरु शिरडी वाला।
रब से मत तकरार करो, हर गलती स्वीकार करो,
फिर वो तेरी सुनेगा, लाखों में तुझको चुनेगा,
पहले मन को साफ़ करो।।
Pehle Mann Ko Saaf Karo By Pankaj Raj [Full HD Song] I Sai Faqeer Ka Deewana
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Sai Bhajan: Pehle Mann Ko Saaf Karo
Album Name: Sai Faqeer Ka Deewana
Singer: Pankaj Raj
Music Director: Jeetu
Lyricist: Pardeep Sahil
Music Label: T-Series
Album Name: Sai Faqeer Ka Deewana
Singer: Pankaj Raj
Music Director: Jeetu
Lyricist: Pardeep Sahil
Music Label: T-Series
आध्यात्मिक साधना का मूल आधार है—मन की निर्मलता और सत्यता। जब तक मनुष्य के भीतर छल, कपट, द्वेष या अहंकार का अंधकार छाया रहता है, तब तक उसकी प्रार्थना और साधना केवल बाहरी आडंबर बनकर रह जाती है। सच्चे अर्थों में ईश्वर या गुरु का सान्निध्य पाने के लिए सबसे पहले अपने अंतर्मन को शुद्ध करना आवश्यक है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता लाकर ही व्यक्ति उस दिव्य कृपा का पात्र बनता है, जो जीवन को सार्थक और आनंदमय बना देती है। जब मनुष्य अपने भीतर की अशुद्धियों को दूर करता है, तो उसकी साधना में गहराई और उसकी प्रार्थना में सच्चाई आ जाती है, जिससे वह परमात्मा के और अधिक निकट पहुँच जाता है।
सच्ची भक्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुख को भी अपना मानने में है। जब व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर, दूसरों के कष्ट को अपना समझकर सेवा करता है, तो उसकी आत्मा में करुणा और प्रेम का विस्तार होता है। सबसे मधुर व्यवहार, यहाँ तक कि शत्रु के प्रति भी प्रेमभाव, और अपनी भूलों को स्वीकार करने का साहस, यही वह गुण हैं जो किसी साधक को सच्ची आध्यात्मिक ऊँचाई तक पहुँचाते हैं। जब मनुष्य भोलेपन, विनम्रता और सत्यता के साथ जीवन जीता है, तो उसकी हर पुकार स्वयं परमात्मा तक पहुँचती है और वह दिव्य कृपा का अनुभव करता है। यही आंतरिक शुद्धता और प्रेम, जीवन को अर्थपूर्ण और आनंदमय बना देती है।
सच्ची भक्ति केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के सुख-दुख को भी अपना मानने में है। जब व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर, दूसरों के कष्ट को अपना समझकर सेवा करता है, तो उसकी आत्मा में करुणा और प्रेम का विस्तार होता है। सबसे मधुर व्यवहार, यहाँ तक कि शत्रु के प्रति भी प्रेमभाव, और अपनी भूलों को स्वीकार करने का साहस, यही वह गुण हैं जो किसी साधक को सच्ची आध्यात्मिक ऊँचाई तक पहुँचाते हैं। जब मनुष्य भोलेपन, विनम्रता और सत्यता के साथ जीवन जीता है, तो उसकी हर पुकार स्वयं परमात्मा तक पहुँचती है और वह दिव्य कृपा का अनुभव करता है। यही आंतरिक शुद्धता और प्रेम, जीवन को अर्थपूर्ण और आनंदमय बना देती है।
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Author - Saroj Jangir
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