स्वागत है मेरे पोस्ट में। आज हम एक दिलचस्प और सीख देने वाली कहानी पढ़ने जा रहे हैं, जिसका नाम है "लालची बिल्ली और बंदर की कहानी।" इस कहानी के माध्यम से हम जानेंगे कि कैसे किसी का भी नुकसान कर सकता है। इस पोस्ट को पढ़कर आपको एक महत्वपूर्ण संदेश मिलेगा, जो आपके जीवन में प्रेरणा का काम करेगा। तो आइए, बिना समय गंवाए कहानी शुरू करते हैं।
लालची बिल्ली और बंदर की कहानी
बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल में हर प्रकार के जानवर आपस में मिल-जुलकर रहते थे और एक-दूसरे की मदद करते थे। इसी जंगल में चिंकी और मिंकी नाम की दो बिल्लियां भी रहती थीं। दोनों एक-दूसरे की बहुत अच्छी दोस्त थीं। वे साथ में खेलतीं, साथ में खाना खातीं और हर समय एक-दूसरे का साथ देती। उनकी इस गहरी दोस्ती की जंगल के सभी जानवर प्रशंसा करते थे।एक दिन, मिंकी को बाजार जाना पड़ा, लेकिन चिंकी किसी कारणवश उसके साथ नहीं जा सकी। अकेले में उसका मन नहीं लगा, तो उसने सोचा कि क्यों ना वो भी बाजार घूम आए। जैसे ही चिंकी बाजार से लौट रही थी, उसे रास्ते में एक ताजा रोटी का टुकड़ा पड़ा मिला। उसके मन में लालच आ गया और उसने सोचा कि इसे अकेले ही खा लिया जाए। वह रोटी का टुकड़ा लेकर अपने घर चली आई।जैसे ही वह रोटी खाने वाली थी, तभी मिंकी वापस आ गई। मिंकी ने चिंकी के हाथ में रोटी देखी और पूछा, "हम तो हमेशा खाना बांटकर खाते हैं। क्या तुम इस रोटी को मेरे साथ नहीं बांटोगी?" यह सुनते ही चिंकी थोड़ी परेशान हो गई। वह सोचने लगी कि अगर मिंकी को रोटी बांट दी, तो उसे कम मिल जाएगी।जल्दी से चिंकी ने कहा, "अरे नहीं बहन, मैं तो रोटी का आधा-आधा कर रही थी ताकि हम दोनों बराबर हिस्से में इसे खा सकें।" मिंकी को यह सुनकर थोड़ा संदेह हुआ, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। जैसे ही चिंकी ने रोटी के दो हिस्से किए, मिंकी ने चिल्लाते हुए कहा, "मेरे हिस्से में कम रोटी आई है!"अब रोटी के बंटवारे को लेकर दोनों में झगड़ा होने लगा और देखते ही देखते यह बात जंगल के बाकी जानवरों तक पहुंच गई। सभी जानवर इनकी लड़ाई देखकर सोच में पड़ गए। तभी वहां एक बंदर आ पहुंचा और उसने दोनों बिल्लियों को समझाते हुए कहा, "तुम लोग मुझे रोटी दो, मैं इसे बराबर-बराबर बांट देता हूं।"बिल्लियों की इच्छा तो नहीं थी लेकिन उन्होंने रोटी बराबर करवाने के लिए रोटी बंदर को दे दी। बंदर ने एक तराजू मंगवाया और उसमें दोनों ओर रोटी के टुकड़े रख दिए। लेकिन चालाक बंदर ने एक चाल चली। वह तराजू का संतुलन बनाने के बहाने एक-एक करके रोटी के बड़े टुकड़े खाता गया। वह कहता कि वह रोटी के दोनों हिस्सों को बराबर कर रहा है, लेकिन असल में वह खुद ही रोटी का अधिकांश हिस्सा खा गया।
अंत में तराजू में बहुत ही छोटे-छोटे रोटी के टुकड़े बचे। बिल्लियां घबरा गईं और उन्होंने बंदर से कहा, "हमें बचे हुए टुकड़े दे दो, हम इसे आपस में बांट लेंगे।" तब बंदर हंसते हुए बोला, "अरे वाह, मेहनत मैंने की और तुम मुझे मेरे हिस्से का फल नहीं दोगी?" यह कहकर बंदर ने बची हुई रोटी भी खा ली और वहां से चला गया। बिल्लियां एक-दूसरे का मुंह ताकती रह गईं और उन्हें समझ में आ गया कि लालच के कारण वे अपनी रोटी से भी हाथ धो बैठी हैं।
कहानी से शिक्षा
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लालच सभी के लिए हानिकारक ही होता है। हमें हमेशा जो हमारे पास है, उसी में संतोष करना चाहिए और आपसी तालमेल से रहना चाहिए। अगर हम लालच में पड़ते हैं, तो जो हमारे पास है, उसे भी खो देते हैं। आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं एक विशेषज्ञ के रूप में रोचक जानकारियों और टिप्स साझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें।
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