कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो भजन
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो भजन
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
अँधेरों भरी हर तेरी राह में,
चले बन उजाला तेरे साथ में।
हो रंगीन पल या ग़मों की घड़ी,
तेरा हाथ होगा सदा हाथ में।
तन्हाई जो तुझको डराने लगे,
कदम गर तेरे डगमगाने लगे,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
है खुशियों में साथी तेरे हर कोई,
बुरे वक्त में सब बदल जाएँगे।
समझता रहा तू जिन्हें हमसफ़र,
तुझे छोड़ आगे निकल जाएँगे।
जब अपने भी आँखें दिखाने लगे,
ज़माना भी ठोकर लगाने लगे,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
घड़ी दो घड़ी की तेरी ज़िन्दगी,
ये पानी के जैसे गुज़र जाएगी।
कर ले भजन तू मेरे श्याम का,
जो बिगड़ी है वो भी संवर जाएगी।
‘तरुण’ जब समय पास आने लगे,
ये साँसें भी हाथों से जाने लगे,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
फँसी नाव को जब किनारा ना हो,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
अँधेरों भरी हर तेरी राह में,
चले बन उजाला तेरे साथ में।
हो रंगीन पल या ग़मों की घड़ी,
तेरा हाथ होगा सदा हाथ में।
तन्हाई जो तुझको डराने लगे,
कदम गर तेरे डगमगाने लगे,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
है खुशियों में साथी तेरे हर कोई,
बुरे वक्त में सब बदल जाएँगे।
समझता रहा तू जिन्हें हमसफ़र,
तुझे छोड़ आगे निकल जाएँगे।
जब अपने भी आँखें दिखाने लगे,
ज़माना भी ठोकर लगाने लगे,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
घड़ी दो घड़ी की तेरी ज़िन्दगी,
ये पानी के जैसे गुज़र जाएगी।
कर ले भजन तू मेरे श्याम का,
जो बिगड़ी है वो भी संवर जाएगी।
‘तरुण’ जब समय पास आने लगे,
ये साँसें भी हाथों से जाने लगे,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो,
तब तुम चले आना दरबार में,
ये बाबा खड़ा है,
खड़ा ही रहेगा तुम्हारे लिये।
कोई जब तुम्हारा सहारा ना हो,
फँसी नाव को जब किनारा ना हो।।
कोई जब सहारा ना हो | Koi jab Sahara na ho | Rajni Rajasthani | latest Shyam bhajan | भावपूर्ण भजन
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जीवन की राह में जब अंधेरा घना हो और कोई साथ न दे, तब श्याम का दरबार ही एकमात्र सहारा बनता है। भवसागर में डूबती नाव को किनारा देने वाला उनका हाथ सदा थामे रहता है। चाहे सुख के पल हों या दुख की घड़ियाँ, उनकी कृपा हर कदम पर साथ चलती है, मन को उजाला देती है। जब तन्हाई डराने लगे, कदम डगमगाने लगें, और अपने भी पराये हो जाएँ, तब श्याम का आश्रय ही सच्चा ठिकाना है। उनकी भक्ति जीवन की हर बिगड़ी को संवार देती है, और उनकी याद में डूबकर साँसों का हर पल सार्थक हो जाता है। उनका दरबार सदा खुला है, जहाँ हर भटके हुए को शरण मिलती है।
श्री श्याम बाबा, श्रीकृष्ण के प्रेममय और करुणामय स्वरूप, भक्तों के लिए सदा हाजिर रहते हैं। खाटू वाले श्याम जी की महिमा ऐसी है कि उनका नाम लेते ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। वे दुखियों के दुखहर्ता और हारे का सहारा हैं। उनका दरबार वह पावन स्थान है, जहाँ भक्तों की हर पुकार सुनाई देती है। चाहे दुनिया ठोकर मारे या समय कठिन हो, श्याम बाबा का प्रेम कभी नहीं बदलता। उनकी भक्ति में डूबकर मन को ऐसी शांति मिलती है, जो संसार में कहीं और नहीं। उनके चरणों में शरण लेने वाला कभी निराश नहीं लौटता, क्योंकि वे सदा अपने भक्तों के साथ खड़े रहते हैं।
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चाँदी का पालना लायो मारा सेठ जी भजन
बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
जीवन की राह में जब अंधेरा घना हो और कोई साथ न दे, तब श्याम का दरबार ही एकमात्र सहारा बनता है। भवसागर में डूबती नाव को किनारा देने वाला उनका हाथ सदा थामे रहता है। चाहे सुख के पल हों या दुख की घड़ियाँ, उनकी कृपा हर कदम पर साथ चलती है, मन को उजाला देती है। जब तन्हाई डराने लगे, कदम डगमगाने लगें, और अपने भी पराये हो जाएँ, तब श्याम का आश्रय ही सच्चा ठिकाना है। उनकी भक्ति जीवन की हर बिगड़ी को संवार देती है, और उनकी याद में डूबकर साँसों का हर पल सार्थक हो जाता है। उनका दरबार सदा खुला है, जहाँ हर भटके हुए को शरण मिलती है।
श्री श्याम बाबा, श्रीकृष्ण के प्रेममय और करुणामय स्वरूप, भक्तों के लिए सदा हाजिर रहते हैं। खाटू वाले श्याम जी की महिमा ऐसी है कि उनका नाम लेते ही सारे संकट दूर हो जाते हैं। वे दुखियों के दुखहर्ता और हारे का सहारा हैं। उनका दरबार वह पावन स्थान है, जहाँ भक्तों की हर पुकार सुनाई देती है। चाहे दुनिया ठोकर मारे या समय कठिन हो, श्याम बाबा का प्रेम कभी नहीं बदलता। उनकी भक्ति में डूबकर मन को ऐसी शांति मिलती है, जो संसार में कहीं और नहीं। उनके चरणों में शरण लेने वाला कभी निराश नहीं लौटता, क्योंकि वे सदा अपने भक्तों के साथ खड़े रहते हैं।
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Author - Saroj Jangir
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