मैया लक्ष्मी पधारो द्वार भरे यश वैभव भजन
मैया लक्ष्मी पधारो द्वार भरे यश वैभव से भंडार
मैया लक्ष्मी पधारो द्वार,
भरे यश वैभव से भंडार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
निर्धन की झोली भरती हो,
धन की वर्षा तुम करती हो,
मिले मान सम्मान अपार,
छाए खुशियों की बहार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
उमा रमा तुमपे बलिहारी,
पूजा करते देव तुम्हारी,
तुम बिन ना कोई त्यौहार,
तुमसे चलता है संसार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
जो कोई भी तुमको ध्याता,
रिद्धि सिद्धि धन वो है पाता,
जिस घर में तुम्हारा वास,
‘अर्चू’ उसका बेड़ा पार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
मैया लक्ष्मी पधारो द्वार,
भरे यश वैभव से भंडार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
भरे यश वैभव से भंडार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
निर्धन की झोली भरती हो,
धन की वर्षा तुम करती हो,
मिले मान सम्मान अपार,
छाए खुशियों की बहार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
उमा रमा तुमपे बलिहारी,
पूजा करते देव तुम्हारी,
तुम बिन ना कोई त्यौहार,
तुमसे चलता है संसार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
जो कोई भी तुमको ध्याता,
रिद्धि सिद्धि धन वो है पाता,
जिस घर में तुम्हारा वास,
‘अर्चू’ उसका बेड़ा पार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
मैया लक्ष्मी पधारो द्वार,
भरे यश वैभव से भंडार,
भक्त पुकार रहे,
तुझे निहार रहे।
मैया लक्ष्मी पधारो द्वार | Maiya Laxmi Padharo Dwar | Maa Laxmi Ke Bhajan | Mata Ke Bhajan
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भक्त निर्धनता और अभाव से मुक्ति हेतु माता को पुकारते हैं, जिनकी कृपा से धन, मान-सम्मान और खुशियों की बहार आती है। संसार के सभी देवी-देवता उनकी पूजा करते हैं; उनके बिना कोई पर्व, उत्सव या शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता। लक्ष्मी माँ जिस घर में वास करती हैं, वहाँ रिद्धि-सिद्धि का संचार होता है और वहाँ के निवासियों की किस्मत बदल जाती है। यही आस्था हर भक्त को माँ में विश्वास रखकर सच्ची श्रद्धा से निहारने और पुकारने के लिए प्रेरित करती है.
लक्ष्मी माता परम ऐश्वर्य, समृद्धि और सुख की दायिनी हैं। वे न केवल भौतिक धन देती हैं, बल्कि जीवन का यश, कीर्ति और सम्मान भी बढ़ाती हैं। उनकी पूजा में सच्ची भावना और श्रद्धा रखना आवश्यक है, क्योंकि वे अति कोमल मन वाली देवी हैं—संकट में शरणागत को तुरंत सहारा देती हैं। उमा, रमा और जगदंबा सभी स्वरूपों में पूजित लक्ष्मी माता संसार की चलायमान ऊर्जा हैं। उनके घर-प्रतिष्ठित होने से जीवन में धन-धान्य, प्रसन्नता और सुख-शांति बनी रहती है.
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Author - Saroj Jangir
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