जब से पकड़े चरण साईं के मन बुद्धि को छोड़ दिया
जब से पकड़े चरण साईं के मन बुद्धि को छोड़ दिया
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
साईं शरण की मस्ती देखो, चारों ओर खुमारी है,
इस संगत का हर मतवाला, साईं की ज़िम्मेदारी है,
जिसने देखा घर साईं का, अपनी गली को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
सब सोचते हैं हम साईं से, मिलने मिलाने आए हैं,
हम जानते हैं इसी बहाने, जान चढ़ाने आए हैं,
इस कारण से हर जंगल को, हर बस्ती को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
यहां कोई कमजोर नहीं है, यहां कोई मजबूर नहीं,
चलते जाना, फ़र्ज़ निभाना, मंज़िल अपनी दूर नहीं,
बीच सफर में रह जाएगा, जिसने जी को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
साईं शरण की मस्ती देखो, चारों ओर खुमारी है,
इस संगत का हर मतवाला, साईं की ज़िम्मेदारी है,
जिसने देखा घर साईं का, अपनी गली को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
सब सोचते हैं हम साईं से, मिलने मिलाने आए हैं,
हम जानते हैं इसी बहाने, जान चढ़ाने आए हैं,
इस कारण से हर जंगल को, हर बस्ती को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
यहां कोई कमजोर नहीं है, यहां कोई मजबूर नहीं,
चलते जाना, फ़र्ज़ निभाना, मंज़िल अपनी दूर नहीं,
बीच सफर में रह जाएगा, जिसने जी को छोड़ दिया,
खुद को करके उसके अर्पण, अपनी खुदी को छोड़ दिया,
जब से पकड़े चरण साईं के, मन बुद्धि को छोड़ दिया।।
Jab Se Pakde Charan Sai Ke [Full Song] - Sai Arpan
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साईं के चरणों में समर्पण करने के बाद जब भक्त अपने मन, बुद्धि और अहंकार को छोड़ देता है, तो उसके जीवन में एक अनोखी शांति और मस्ती छा जाती है। यह समर्पण उसे सांसारिक भटकाव, स्वार्थ और चिंता से मुक्त कर देता है, और वह साईं की कृपा में डूबकर हर परिस्थिति में संतुष्ट और निर्भय रहता है। साईं की संगत में हर भक्त खुद को सुरक्षित और जिम्मेदारी से भरा महसूस करता है, क्योंकि अब उसका जीवन साईं के संरक्षण में है।
इस मार्ग पर चलने वाले जानते हैं कि साईं की शरण में आकर उन्होंने अपने पुराने मोह, भ्रम और स्वार्थ को त्याग दिया है। अब उनका लक्ष्य केवल सेवा, साधना और सच्चे मार्ग पर चलना है। यहां कोई कमजोर या मजबूर नहीं, बल्कि सब अपने कर्तव्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। जिसने अपना अहंकार और खुदी छोड़ दी, वही साईं की कृपा और सच्चे आनंद का अधिकारी बन जाता है।
इस मार्ग पर चलने वाले जानते हैं कि साईं की शरण में आकर उन्होंने अपने पुराने मोह, भ्रम और स्वार्थ को त्याग दिया है। अब उनका लक्ष्य केवल सेवा, साधना और सच्चे मार्ग पर चलना है। यहां कोई कमजोर या मजबूर नहीं, बल्कि सब अपने कर्तव्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं। जिसने अपना अहंकार और खुदी छोड़ दी, वही साईं की कृपा और सच्चे आनंद का अधिकारी बन जाता है।
Jab Se Pakde Charan Sai Ke
Album: Sai Arpan
Singer: Manhar Udhas
Music Director: Pandit K. Razdaan
Lyricist: Pandit K. Razdaan
Music Label: T-Series
Album: Sai Arpan
Singer: Manhar Udhas
Music Director: Pandit K. Razdaan
Lyricist: Pandit K. Razdaan
Music Label: T-Series
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Author - Saroj Jangir
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