गोदी में उठा लो मेरी मां कान्हा छोटे हैं
गोदी में उठा लो मेरी मां कान्हा छोटे हैं
गोदी में उठा लो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा का छोटा-सा माथा है,
मुकुट पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा का छोटा-सा गला है,
हार पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे गजानन के छोटे-छोटे हाथ हैं,
मुरली पकड़ा दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा के छोटे-छोटे पांव हैं,
पायल पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा के छोटे-छोटे अंग हैं,
पीतांबर पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा का छोटा-सा मुख है,
माखन खिला दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा का छोटा-सा माथा है,
मुकुट पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा का छोटा-सा गला है,
हार पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे गजानन के छोटे-छोटे हाथ हैं,
मुरली पकड़ा दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा के छोटे-छोटे पांव हैं,
पायल पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा के छोटे-छोटे अंग हैं,
पीतांबर पहना दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
मेरे कान्हा का छोटा-सा मुख है,
माखन खिला दो मेरी मां, कान्हा छोटे हैं।
जन्माष्टमी भजन▹गोदी में उठा लो मेरी माँ कन्हैया छोटे है |Godi Mein Utha Lo Meri Maa |Krishna Bhajan
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नन्हें कान्हा की मासूमियत और कोमलता मन को सहज ही आकर्षित कर लेती है। उनका छोटा सा माथा, जिस पर मुकुट सजता है, बालपन की निश्छलता को दर्शाता है। गले में हार, हाथों में मुरली और पैरों में पायल उनके बाल रूप की सुंदरता को और भी मनमोहक बना देते हैं। पीताम्बर की कोमल छाया उनके छोटे-छोटे अंगों को और भी मधुर बना देती है। उनका छोटा सा मुख माखन खाते हुए बाल सुलभ चंचलता और आनंद से भर जाता है।
हर वस्त्र, आभूषण और माखन के स्वाद में वात्सल्य और स्नेह की गहराई समाई हुई है। यह भाव मन में गहरा अपनापन, ममता और देखभाल की भावना जगाता है, जैसे एक मां अपने शिशु को सजा-संवार रही हो। नन्हें कान्हा को स्नेह, सुरक्षा और दुलार की आवश्यकता है, और उनके प्रति यह वात्सल्य मन को आनंद, करुणा और प्रेम से भर देता है। उनका बाल रूप जीवन में सरलता, निश्छलता और निर्मल प्रेम की अनुभूति कराता है।
■Title : Godi Me Utha Lo Meri Maa Kanhaiya Chote Hai
■Artist : Priyanka
■Singer : Simran Rathore
■Music : Kuldeep Mali Aala
■Lyrics & Composer : Traditional
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
नन्हें कान्हा की मासूमियत और कोमलता मन को सहज ही आकर्षित कर लेती है। उनका छोटा सा माथा, जिस पर मुकुट सजता है, बालपन की निश्छलता को दर्शाता है। गले में हार, हाथों में मुरली और पैरों में पायल उनके बाल रूप की सुंदरता को और भी मनमोहक बना देते हैं। पीताम्बर की कोमल छाया उनके छोटे-छोटे अंगों को और भी मधुर बना देती है। उनका छोटा सा मुख माखन खाते हुए बाल सुलभ चंचलता और आनंद से भर जाता है।
हर वस्त्र, आभूषण और माखन के स्वाद में वात्सल्य और स्नेह की गहराई समाई हुई है। यह भाव मन में गहरा अपनापन, ममता और देखभाल की भावना जगाता है, जैसे एक मां अपने शिशु को सजा-संवार रही हो। नन्हें कान्हा को स्नेह, सुरक्षा और दुलार की आवश्यकता है, और उनके प्रति यह वात्सल्य मन को आनंद, करुणा और प्रेम से भर देता है। उनका बाल रूप जीवन में सरलता, निश्छलता और निर्मल प्रेम की अनुभूति कराता है।
■Title : Godi Me Utha Lo Meri Maa Kanhaiya Chote Hai
■Artist : Priyanka
■Singer : Simran Rathore
■Music : Kuldeep Mali Aala
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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