क्या खूब लग रहे देखो फूलों में लखदातार भजन
क्या खूब लग रहे देखो फूलों में लखदातार भजन
इतना सुंदर मुखड़ा,
उस पर ऐसा श्रृंगार,
महके जूही और चंपा,
गेंदा, बेला, गुलनार,
इन फूलों की महक से तेरा,
महक उठा दरबार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
तेरे मोर मुकुट का क्या कहना,
केशों का बना है जो गहना,
मणियां जो लगे निराली हैं,
उस पर ये लट घुंघराली हैं,
कानों में कुंडल चमके,
चमके है गले का हार,
तेरे तेज भरे दो नैना,
उस पे कजरे की धार,
तेरे कजरारे नैनों पर मैं,
सदके जाऊं सौ बार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
चेहरे पर सूरज की लाली है,
मुस्कान अजब सी मतवाली है,
दिल कहे नज़र न लग जाए,
यही सोच के मन है घबराए,
क्योंकि तुझ में खो जाता,
जो आता है एक बार,
सबको ही सहारा देता,
सबको करता है प्यार,
मंद~मंद मुस्काते रहते,
खाटू के सरकार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
क्या शोभा का मैं गुणगान करूं,
कैसे गीतों में मैं बखान करूं,
तेरी महिमा का न सार मिले,
तेरे नैनों से तार मिले,
तेरी महक से धीरज मिलता,
होता जब~जब दीदार,
तेरा दीवाना बन करके,
जो करे तेरा सत्कार,
देख के सूरत तेरी,
खुश होता ये संसार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
इतना सुंदर मुखड़ा,
उस पर ऐसा श्रृंगार,
महके जूही और चंपा,
गेंदा, बेला, गुलनार,
इन फूलों की महक से तेरा,
महक उठा दरबार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
उस पर ऐसा श्रृंगार,
महके जूही और चंपा,
गेंदा, बेला, गुलनार,
इन फूलों की महक से तेरा,
महक उठा दरबार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
तेरे मोर मुकुट का क्या कहना,
केशों का बना है जो गहना,
मणियां जो लगे निराली हैं,
उस पर ये लट घुंघराली हैं,
कानों में कुंडल चमके,
चमके है गले का हार,
तेरे तेज भरे दो नैना,
उस पे कजरे की धार,
तेरे कजरारे नैनों पर मैं,
सदके जाऊं सौ बार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
चेहरे पर सूरज की लाली है,
मुस्कान अजब सी मतवाली है,
दिल कहे नज़र न लग जाए,
यही सोच के मन है घबराए,
क्योंकि तुझ में खो जाता,
जो आता है एक बार,
सबको ही सहारा देता,
सबको करता है प्यार,
मंद~मंद मुस्काते रहते,
खाटू के सरकार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
क्या शोभा का मैं गुणगान करूं,
कैसे गीतों में मैं बखान करूं,
तेरी महिमा का न सार मिले,
तेरे नैनों से तार मिले,
तेरी महक से धीरज मिलता,
होता जब~जब दीदार,
तेरा दीवाना बन करके,
जो करे तेरा सत्कार,
देख के सूरत तेरी,
खुश होता ये संसार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
इतना सुंदर मुखड़ा,
उस पर ऐसा श्रृंगार,
महके जूही और चंपा,
गेंदा, बेला, गुलनार,
इन फूलों की महक से तेरा,
महक उठा दरबार,
क्या खूब लग रहे देखो,
फूलों में लखदातार।।
कैसा लगता है हमारा श्याम बाबा ? | Kitna Sundar Mukhda | Khatu Shyam Bhajan | Anjali Dwivedi
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फूलों से सजा लखदातार का मुखड़ा चमक उठता है, जूही चंपा गेंदा बेला गुलनार की महक दरबार महका देती है। मोर मुकुट केशों का गहना, मणि-लट घुंघरू चमकाए कुंडल झिलमिलाते गले का हार। कजरारे नैना तेज भरे, सूरज सी लाली चेहरे पर मुस्कान मतवाली। साधकों को इश्वर का आशीर्वाद इस श्रृंगार से मिलता है, जैसे कोई राजा हर मुश्किल सँभाल ले।
मंद मुस्कान सबको प्यार बाँटे, सहारा देती जाए हर आने वाले को। महिमा गुनगुनाने को जी चाहे, दीदार से धीरज मिले तार सी नैनों से। खाटू के सरकार में खो जाएँ तो मन घबरा उठे नज़र से। दुनिया खुश हो जाती है सूरत देख एक बार। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री लखदातार जी! जय श्री श्याम जी!
मंद मुस्कान सबको प्यार बाँटे, सहारा देती जाए हर आने वाले को। महिमा गुनगुनाने को जी चाहे, दीदार से धीरज मिले तार सी नैनों से। खाटू के सरकार में खो जाएँ तो मन घबरा उठे नज़र से। दुनिया खुश हो जाती है सूरत देख एक बार। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री लखदातार जी! जय श्री श्याम जी!
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Author - Saroj Jangir
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