मैं कितना अधम हूँ ये तुम ही जानो भजन
मैं कितना अधम हूँ ये तुम ही जानो भजन
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो
मैं क्या चाहता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
ना दीनता है ना भाव भक्ति
ना कुछ भजन है ना आत्मशक्ति
मैं क्या देखता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
दुनिया से मुझको फुर्सत ना मिलती
तक़दीर की मेरी अटकन ना मिटती
मैं क्या मांगता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
यही दर्द दिल में तड़पन है भारी
तेरे दर पे आया आगे मर्ज़ी तुम्हारी
मैं पागल बना हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो
मैं क्या चाहता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
ये तुम ही जानो
मैं क्या चाहता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
ना दीनता है ना भाव भक्ति
ना कुछ भजन है ना आत्मशक्ति
मैं क्या देखता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
दुनिया से मुझको फुर्सत ना मिलती
तक़दीर की मेरी अटकन ना मिटती
मैं क्या मांगता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
यही दर्द दिल में तड़पन है भारी
तेरे दर पे आया आगे मर्ज़ी तुम्हारी
मैं पागल बना हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो
मैं क्या चाहता हूँ
ये तुम ही जानो
मैं कितना अधम हूँ
ये तुम ही जानो।
भक्त की भगवान से प्रार्थना - मैं कितना अधम हु ये तुम ही जानो | Superhit Krishna Bhajan | बृज भाव
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मन की गहराइयों में यह स्वीकार है कि अपनी कमियों, अपनी अधमता को केवल श्याम ही समझ सकते हैं। उनकी कृपा के सामने हर कमी छोटी पड़ जाती है, क्योंकि वे ही मन की हर चाह को जानते हैं। भक्ति का भाव हो या न हो, भजन की शक्ति हो या न हो, आत्मा में जो कमी है, उसे वे ही देखते और समझते हैं।
दुनिया की भागदौड़ में मन ऐसा उलझा है कि शांति की एक पल भी नसीब नहीं होती। तक़दीर की गाँठें खुलती नहीं, और मन की बेचैनी बढ़ती जाती है। फिर भी, यह विश्वास है कि श्याम हर माँग, हर तड़प को जानते हैं। उनकी शरण में आने की चाह ही मन को खींच लाती है।
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बन गए श्याम तेरे बावरे सांवरे
सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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मन की गहराइयों में यह स्वीकार है कि अपनी कमियों, अपनी अधमता को केवल श्याम ही समझ सकते हैं। उनकी कृपा के सामने हर कमी छोटी पड़ जाती है, क्योंकि वे ही मन की हर चाह को जानते हैं। भक्ति का भाव हो या न हो, भजन की शक्ति हो या न हो, आत्मा में जो कमी है, उसे वे ही देखते और समझते हैं।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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