नहीं धन दौलत की चाहत है है कर्म तेरा ये राहत है

नहीं धन दौलत की चाहत है है कर्म तेरा ये राहत है

नहीं धन दौलत की चाहत है,
है कर्म तेरा ये राहत है,
तूने जितना दिया है, खुश हैं हम,
चाहिए न ख़ज़ाना और जागीर,
तू भी फ़कीर, मैं भी फ़कीर।।

साईं इतना दीजिए, जामें कुतुब समाए,
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाए।।

दो रोटी की हो नियामत, 
बस इतनी सी है साईं चाहत,
कुछ हो न हो इस जीवन में, 
तेरी बंदगी हो पीरों की पीर,
तू भी फ़कीर, मैं भी फ़कीर।।

साईं के दरबार से खाली गया न कोई,
जो चौखट तक आ गए, 
भला सभी का होई।।

साईं हमसे शराफ़त होती रहे,
बस तेरी इबादत होती रहे,
न हो हमसे कोई गुस्ताख़ी,
रहे पाक सदा अपनी ज़मीर,
तू भी फ़कीर, मैं भी फ़कीर।।


Nahin Dhan Daulat Ki Chahat Hai I SURESH WADKAR, SUSHILA I Sai Bhajan I Sai Jabse Tum Mile Ho, Audio

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About Bhajan -

Sai Bhajan: Nahin Dhan Daulat Ki Chahat Hai
Singers: Uresh Wadkar, Sushila
Music Director: Pt. Jwala Prasad
Lyricist: Jitendra Raghuvanshi
Album: Sai Jabse Tum Mile Ho

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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