हिंग्वाष्टक चूर्ण के फायदे Benefits of Hingwashtak Churna
यह आठ औषधीय गुणों से युक्त सामग्रियों से बनने वाला एक चूर्ण है जिसके सेवन से अजीर्ण, आफरा, गैस, कब्ज, कमजोर पाचन आदि विकार दूर होते हैं। इस चूर्ण का निर्माण आप अपने घर पर ही कर सकते हैं।
हिंग्वाष्टक चूर्ण के घटक Ingredients of Hingwashtak Churna
इस चूर्ण में वैसे तो जो सामग्री उपयोग में ली जाती है वह आपकी रसोई में उपलब्ध हो जाती है, लेकिन यदि कोई सामग्री नहीं मिले तो आप पंसारी की दुकान से इसे प्राप्त कर सकते हैं।
- सोंठ - 15 ग्राम
- कालीमिर्च- 15 ग्राम
- पीपल- 15 ग्राम
- अजवायन- 15 ग्राम
- सेंधा नमक- 15 ग्राम
- काला जीरा - 15 ग्राम
- सादा जीरा- 15 ग्राम
- हींग १० ग्राम
हिंग्वाष्टक चूर्ण के फायदे Hingwashtak Churna Benefits
- हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से आंत्र शूल दूर होता है। आँतों के दर्द को दूर करने के लिए यह चूर्ण लाभदाई है।
- आँतों की निर्बलता को दूर करने के लिए हिंग्वाष्टक चूर्ण का सेवन किया जाता है। आँतों की कमजोरी के कारण ही भोजन करने के तुरंत उपरान्त थोड़ा थोड़ा करके मल त्याग के लिए जाना पड़ता है।
- उदर में भारीपन के साथ यदि मुँह का स्वाद फीका रहे तो हिंग्वाष्टक चूर्ण के साथ जायफल, जावित्री मिलाकर थोड़ी थोड़ी मात्रा में देने से तुरंत लाभ मिलता है (रस तंत्र सार )
- हिंग्वाष्टक चूर्ण का मुख्य घटक हींग होती है। हींग में उदर वातघन और शूलहर गुणों की प्रधानता होती है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण आँतों और अमाशय में संगृहीत वायु को दूर करता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण उदर शूल में अत्यंत लाभदाई होता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से पाचक रसों का स्त्राव बढ़ता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से आँतों के कीटाणु समाप्त होते हैं।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण यकृपित्त को सबल बनाकर पित्त के स्त्राव को बढ़ाता है।
- पाचन को दुरुस्त करने में हिंग्वाष्टक चूर्ण लाभदाई होता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से अपान वायु रिलीज़ हो जाती है और इसके कारण होने वाले सर दर्द में लाभ मिलता है।
- गैस विकारों को दूर कर पेट को हल्का रखता है और आफरा, अम्ल पित्त में भी लाभदाई होता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण भोजन के पचाने में सहायता करता है और शरीर की दुर्बलता को दूर करता है।
- यह श्रेष्ठ पाचक और दीपक होता है। मल को ढीला बनाता है। हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से पुरानी कब्ज दूर होती है। हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन से गैस और आफरा (पेट फूलना ) जैसे विकारों में लाभ मिलता है। अजीर्णता को समाप्त करता है।
- इस चूर्ण को भोजन से पहले लिया जाता है जिससे ये बढे हुए पित्त को नियंत्रित करता है।
- हिंग्वाष्टक चूर्ण मुख्यतया पाचन रसो के स्राव को नियन्त्रिक करता है और पाचन से सबंधित विकारों को दूर करता है।
- भूख के प्रति अरुचि को दूर करता है और जठराग्नि को जाग्रत करता है। यह पाचक रसों के स्राव को बढ़ा देता है।
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हिंग्वाष्टक चूर्ण बनाने की विधि Hingwashtak Churna Banaane Ki Vidhi
उक्त सामग्री को साफ़ कर लें (कोई कचरा हो तो निकाल दें ) और फिर इसे पहले कूट कर दरदरा बना लें। अब इस दरदरे मिश्रण को मिक्सी में पीस कर बारीक चूर्ण बना लें। यदि कोई टुकड़ा बड़ा बच जाता है तो पुनः मिक्सी में पीस लें।
दस ग्राम हींग को देसी गाय के घी में अच्छे से भून लें। घी आपको एक चम्मच प्रयाप्त रहेगा, आप देख लें की अच्छे से घी भून जाए और अतिरिक्त घी भी नहीं बचे। मिक्सी से तैयार किये गए चूर्ण को आप इस भुनी हुयी हींग में मिला दें और काच के हवाबंद डिब्बे में बंद करके रखे। चूर्ण लेते समय चम्मच में पानी नहीं लगा होना चाहिए जिससे आपका चूर्ण लम्बे समय तक सुरक्षित बना रहेगा।
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हिंग्वाष्टक चूर्ण का सेवन कैसे करें Doses of Hingwashtak Churna
हिंग्वाष्टक चूर्ण को खाना खाने के आधा घंटे पहले आधा (लगभग ३ ग्राम) चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेने का विधान है। निवेदन है की इस हेतु आप वैद्य से संपर्क करें और वैद्य की देख रेख और दिशा निर्देशों के मुताबिक़ इस चूर्ण का सेवन करें।
हिंग्वाष्टक चूर्ण के सेवन में सावधानिया Side Effects/Precaution for Hingwashtak Churna
इस चूर्ण के वैसे तो कोई ज्ञात दुष्परिणाम नहीं होते हैं फिर भी आप इसके सेवन से पूर्व अपने शरीर की तासीर के मुताबिक चूर्ण के सेवन सबंधी राय लेवे। इस चूर्ण को निम्न परिस्थितियों में नहीं लेना चाहिए। इस चूर्ण में नमक का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए ब्लड प्रेशर की शिकायत में इसे उपयोग में नहीं लेना चाहिए। यदि इसके सेवन से पेट में जलन हो तो इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए। छोटे बच्चों को इस हिंग्वाष्टक चूर्ण नहीं दिया जाना चाहिए। इस चूर्ण का सेवन स्वंय की मर्जी से नहीं किया जाना चाहिए। वैद्य की उचित सलाह के उपरांत इसका सेवन करना चाहिए। अधिक मात्रा में इसका सेवन उचित नहीं होता है और यह पेट से सबंधित विकार उत्पन्न कर सकता है।
हिंग्वाष्टक चूर्ण के घटक द्रव्यों की संक्षिप्त जानकारी
हींग : आमतौर पर हींग (Asafoetida) को गरिष्ठ भोजन के भगार के साथ उपयोग करने का कारण यही है की यह गैस नाशक है और पाचन में सहयोगी होती है। हींग के सेवन के कई लाभ होते हैं क्योंकि हींग में जैसे कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटीन, राइबोफ्लेविन और नियासिन आदि लाभदायक विटामिन और खनिज होते हैं। घरों में हींग का प्रयोग कब्ज दूर करने, गैस को समाप्त करने के लिए किया जाता रहा है। इसके अलावा शरीर में दर्द होने और दांतों के दर्द के लिए भी हींग का उपयोग किया जाता है।
सोंठ (Zingiber officinale Roscoe, Zingiberacae)
अदरक ( जिंजिबर ऑफ़िसिनेल / Zingiber officinale ) को पूर्णतया पकने के बाद इसे सुखाकर सोंठ बनायी जाती है। ताजा अदरक को सुखाकर सौंठ बनायी जाती है जिसका पाउडर करके उपयोग में लिया जाता है। अदरक मूल रूप से इलायची और हल्दी के परिवार का ही सदस्य है। अदरक संस्कृत के एक शब्द " सृन्ग्वेरम" से आया है जिसका शाब्दिक अर्थ सींगों वाली जड़ है (Sanskrit word srngaveram, meaning “horn root,”) ऐसा माना जाता रहा है की अदरक का उपयोग आयुर्वेद और चीनी चिकित्सा पद्धति में 5000 साल से अधिक समय तक एक टॉनिक रूट के रूप में किया जाता रहा है। सौंठ का स्वाद तीखा होता है और यह महकदार होती है। अदरक गुण सौंठ के रूप में अधिक बढ़ जाते हैं। अदरक जिंजीबरेसी कुल का पौधा है। अदरक का उपयोग सामान्य रूप से हमारे रसोई में मसाले के रूप में किया जाता है।
चाय और सब्जी में इसका उपयोग सर्दियों ज्यादा किया जाता है। अदरक के यदि औषधीय गुणों की बात की जाय तो यह शरीर से गैस को कम करने में सहायता करता है, इसीलिए सौंठ का पानी पिने से गठिया आदि रोगों में लाभ मिलता है। सामान्य रूप से सौंठ का उपयोग करने से सर्दी खांसी में आराम मिलता है। अन्य ओषधियों के साथ इसका उपयोग करने से कई अन्य बिमारियों में भी लाभ मिलता है।
नवीनतम शोध के अनुसार अदरक में एंटीऑक्सीडेंट्स के गुण पाए जाते हैं जो शरीर से विषाक्त प्रदार्थ को बाहर निकालने में हमारी मदद करते हैं और कुछ विशेष परिस्थितियों में कैंसर जैसे रोग से भी लड़ने में सहयोगी हो सकते हैं। पाचन तंत्र के विकार, जोड़ों के दर्द, पसलियों के दर्द, मांपेशियों में दर्द, सर्दी झुकाम आदि में सौंठ का उपयोग श्रेष्ठ माना जाता है। सौंठ के पानी के सेवन से वजन नियंत्रण होता है और साथ ही यूरिन इन्फेक्शन में भी राहत मिलती है। सौंठ से हाइपरटेंशन दूर होती है और हृदय सबंधी विकारों में भी लाभदायी होती है। करक्यूमिन और कैप्साइसिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट के कारन सौंठ अधिक उपयोगी होता है।
सौंठ गुण धर्म में उष्णवीर्य, कटु, तीक्ष्ण, अग्निदीपक, रुचिवर्द्धक पाचक, कब्जनिवारक तथा हृदय के लिए हितकारी होती है। सौंठ वातविकार, उदरवात, संधिशूल (जोड़ों का दर्द), सूजन आदि आदि विकारों में हितकारी होती है। सौंठ की तासीर कुछ गर्म होती है इसलिए विशेष रूप से सर्दियों में इसका सेवन लाभकारी होता है
काली मिर्च
कालीमिर्च का वानस्पतिक नाम पाइपर निग्राम (Piper nigrum) है। काली मिर्च के कई औषधीय गुण हैं। काली मिर्च मैंगनीज, लोहा, जस्ता, कैल्शियम, पोटेशियम, विटामिन ए, विटामिन के, विटामिन सी, फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं । इसका प्रमुख गुण जो गैस हर चूर्ण में इस्तेमाल किया जाता है वह है की काली मिर्च गैस और एसिडिटी को समाप्त करती है और पाचन तंत्र सुधरता है। कालीमिर्च के सेवन से हमारे शरीर में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का स्राव बढ़ जाता है और पाचन में सहायता मिलती है। इसके अतिरिक्त ये पेशाब के साथ विषाक्त प्रदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में सहयोगी होती है। कालीमिर्च में विटामिन सी, विटामिन ए, फ्लेवोनॉयड्स, कारोटेन्स और अन्य एंटी -ऑक्सीडेंट होता है, जिससे महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
काली मिर्च के प्रमुख फायदे :-
- काली मिर्च शरीर में पोषण को बढ़ावा देती है। काली मिर्च में निहित पिपेरीने, विटामिन ए और विटामिन सी, सेलेनियम, बीटा कैरोटीन जैसे पोषक तत्व होते हैं।
- काली मिर्च पाचन तंत्र के सुधार में सहायता करता है।
- काली मिर्च के सेवन से भूख जाग्रत होती है।
- सर्दी खांसी में काली मिर्च उपयोगी है।
- शरीर में जोड़ों के दर्द में काली मिर्च लाभदाई होती है।
- काली मिर्च गर्म तासीर की होती है जो कफ्फ निसारक होती है।
- काली मिर्च शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के लिए बेहतर विकल्प है। यह शरीर से विषाक्त कणों को बाहर निकालने में मदद करती है।
पिप्पली : पीपली / पीपल पीपलामूल या बड़ी पेपर को Piper longum(पाइपर लोंगम)के नाम से भी जाना जाता है। संस्कृत में इसे कई नाम दिए गए हैं यथा पिप्पली, मागधी, कृष्णा, वैदही, चपला, कणा, ऊषण, शौण्डी, कोला, तीक्ष्णतण्डुला, चञ्चला, कोल्या, उष्णा, तिक्त, तण्डुला, मगधा, ऊषणा आदि। बारिस की ऋतू में इसके पुष्प लगते हैं और शरद ऋतु में इसके फल लगते हैं। इसके फल बाहर से खुरदुरे होते हैं और स्वाद में तीखे होते हैं। आयुर्वेद में इसको अनेकों रोगों के उपचार हेतु प्रयोग में लिया जाता है। अनिंद्रा, चोट दर्द, दांत दर्द, मोटापा कम करने के लिए, पेट की समस्याओं के लिए इसका उपयोग होता है। पिप्पली की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मियों में इसका उपयोग ज्यादा नहीं करना चाहिए।
- पिप्पल के मुख्य फायदे पिप्पली पाचन में सुधार करती है और भूख को जाग्रत करती है।
- पिप्पली लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करती है।
- पिप्पली चूर्ण के सेवन से सर दर्द में लाभ मिलता है।
- नमक और हल्दी के साथ पिप्पली के चूर्ण से दांतों के दर्द में लाभ मिलता है।
- पिप्पली चूर्ण को शहद के साथ लेने पर मोटापे में लाभ मिलता है, माटापा दूर होता है।
- सर्दी झुकाम आदि विकारों में भी पिप्पली चूर्ण का लाभ मिलता है।
- पिप्पली की तासीर गर्म होती है और यह कफ्फ को दूर करता है।
- वात जनित विकारों में पिप्पली के चूर्ण से लाभ मिलता है।
- दमा और सांस फूलना जैसे विकारों में भी पिप्पली चूर्ण के सेवन से लाभ मिलता है।
डाबर हिंग्वाष्टक चूर्ण Indication:Loss of taste, gas, abdominal pain and indigestion, Diarrhoea, peptic and gastric ulcer. Dose:¼ to ½ tea spoonful (1 to 3gm) twice a day or as directed by the physician. Packing:30gm.60gm and 500gm.
https://www.dabur.com/daburmediclub/products/churna/hgingwastak-churna.html
बैद्यनाथ हिंग्वाष्टक चूर्ण Improves digestion power. It is used in the treatment of anorexia. Good diet supplement in rheumatoid arthritis.इस चूर्ण को भोजन के समय प्रथम निवाले में घी में मिलाकर खाने के बाद फिर भोजन करने से अग्नि प्रदीप्त होती है और वात रोगों में लाभ होता है। इससे वात प्रधान मंदाग्नि अच्छी हो जाती है। पेट में वायु का जमा होना, डकारे आना, भूख न लगना आदि की यह उत्तम दवा है। यह चूर्ण उत्तम दीपन और पाचन है।
https://www.baidyanath.com/product/hingwastak-churna/
The author of this blog,
Saroj Jangir (Admin),
is a distinguished expert in the field of Ayurvedic Granths. She has a
diploma in Naturopathy and Yogic Sciences. This blog post, penned by me,
shares insights based on ancient Ayurvedic texts such as Charak
Samhita, Bhav Prakash Nighantu, and Ras Tantra Sar Samhita. Drawing from
an in-depth study and knowledge of these scriptures, Saroj Jangir has
presented Ayurvedic Knowledge and lifestyle recommendations in a simple
and effective manner. Her aim is to guide readers towards a healthy life
and to highlight the significance of natural remedies in Ayurveda.
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं इस ब्लॉग पर रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियों और टिप्स यथा आयुर्वेद, हेल्थ, स्वास्थ्य टिप्स, पतंजलि आयुर्वेद, झंडू, डाबर, बैद्यनाथ, स्किन केयर आदि ओषधियों पर लेख लिखती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें।
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